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You searched for: subject:"kolkhyan"
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[texts]Prafulla Kolkhyan Bhasha Me Bhranti - Prafulla Kolkhyan
Bhasha Me Bhranti
Keywords: kolkhyan
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[texts]Prafulla Kolkhyan Format Bhasha Me Bhranti - PrafuLla Kolkhyan
BHASHA ME BHRANTI
Keywords: Kolkhyan
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[texts]de - de
Prafulla Kolkhyan Ki Kahani Terah Kathwa
Keywords: Kolkhyan
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[texts]यकीनन, समाधान है साहस - प्रफुल्ल कोलख्यान
हमारा नागरिक समाज एक नहीं है। दिल्ली का नागरिक समाज, मुंबई का नागरिक समाज, कोलकाता, चेन्नेई आदि के न सिर्फ नागरिक समाज अलग-अलग हैं, बल्कि इन नागरिक समाजों की हैसियत भी अलग-अलग है; मणिपुर, मेघालय ...
Keywords: kolkhyan
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[texts]Prafulla Kolkhyan Apne Morche Par Marane Ki Jid. - Prafulla Kolkhyan
Apne Morche Par Marane Ki Jid.
Keywords: kolkhyan
Downloads: 22
[texts]Prafulla Kolkhyan DALIT RAJNITI KI SAMASYAEN - Prafulla Kolkhyan
DALIT RAJNITI KI SAMASYA
Keywords: kolkhyan
Downloads: 12
[texts]भारतीयता का सार - प्रफुल्ल कोलख्यान
उदारीकरण-निजीकरण-भूमंडलीकरण के इस दौर में भीतरी और बाहरी, अपने और पराये, स्थानिक और वैश्विक, तात्कलिक और शाश्वत, शक्ति और शील, सौंदर्य और शिव, नूतन और पुरातन के बीच के द्वंद्व, तनाव और संतुलन बि...
Keywords: kolkhyan
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[texts]Vyakti Samaj AurSahiya - Prafulla Kolkhyan
Essay
Keywords: kolkhyan
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[texts]Kabir Sahitya - Prafulla Kolkhyan
KABIR SAHITYA
Keywords: kolkhyan
Downloads: 140
[texts]Kabir Sahitya - Prafulla Kolkhyan
Kabir Sahitya
Keywords: kolkhyan
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[texts]भाषा में भ्रांति - प्रफुल्ल कोलख्यान (Prafulla kolkhyan)
भाषा सामाजिकता की जीवनी शक्ति और सौंदर्य-शक्ति को भी सुगठित और संरक्षित करती है। लक्षित किया जा सकता है कि कैसे एक भाषा के गर्भ में पलती हुई दूसरी भाषा उससे बाहर निकलकर एक नये भाषिक प्रस्थान क...
Keywords: कोलख्यान,Kolkhyan
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[texts]भिखारी सारी दुनिया - प्रफुल्ल कोलख्यान
बाहर बहुत तेजी से फैलते हुए बाजार का विचार हमें गरीब और भीतर का बेलगाम लालच भिखारी बना रहा है। ऐसा लगता है कि सचमुच सारी दुनिया भिखारी हो गयी है। ऐसे में महात्मा गाँधी की याद आना सहज स्वाभाविक ...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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[texts]चिढ़ का चौताल - प्रफुल्ल कोलख्यान
अधिक पढ़े-लिखे आदमी का इतिहास से जो रिश्ता होता है, कम पढ़े-लिखे का वही नाता किंवदंतियों से होता है। कम पढ़ा-लिखा आदमी किंवदंतियों की चरितकथा की छानबीन में अपना वक्त जाया नहीं करता, प्रेरणा ले...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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[texts]दुविधा में नीलू - प्रफुल्ल कोलख्यान
गरीब के घर की दीवारें कच्ची होती है। दीवारों के किसी कमजोर हिस्से को धराशायी करती हुई खुशियाँ निकल भी जाती है। यह नहीं कि हर बार ऐसा ही होता है लेकिन अधिकतर बार ऐसा ही होता है। ऐसा है यह दुश्चक्...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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[texts]भय और भरोसा - प्रफुल्ल कोलख्यान
मनुष्य भूत से डरता है और भगवान पर भरोसा कर अपने भय को काबू में करने की कोशिश करता रहा है। लेकिन जब भूत ही भगवान बनकरसामने आ जाये तो? जो सामाजिक शक्ति और संगठन भरोसा का आधार बनाते थे वे सामाजिक शक...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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[texts]अच्छी हिंदी - प्रफुल्ल कोलख्यान
मेरी हिंदी बहुत ही कमजोर थी। आज भी बहुत मजबूत होने का दावा नहीं है। लिखने में बहुत ही अशुद्धियाँ हुआ करती थीं। अशुद्धियाँ आज नहीं होती हैं, ऐसा नहीं है। लेकिन पहले होनेवाली अशुद्धियों की तुलन...
Keywords: kolkhyan,कोलख्यान
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[texts]प्रफुल्ल कोलख्यान की कविता - प्रफुल्ल कोलख्यान
चिता की लपट मद्धम न पड़ जाये और उजाला किये जाने का भरम बना रहे इसका ख्यालकर तेजी से सुलगाये जा रहे हैं जंगल
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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[texts]व्यक्ति, समाज और साहित्य - प्रफुल्ल कोलख्यान Prafulla Kolkhyan
समाज द्वारा प्रदत्त साहस की सीमा-रेखा से बाहर जाकर किये जानेवाले आचरण को ही समाज अपराध करार देता है। वस्तुत: समाज विरोधी आचरण का भी एक सामाजिक पहलू होता है। समाज और व्यक्ति का चुंबकीय संबंध दो...
Keywords: kolkhyan,कोलख्यान
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[texts]Prafulla Kolkhyan DALIT RAJNITI KI SAMASYAEN - Prafulla Kolkhyan
DALIT RAJNITI KI SAMASYAEN
Keywords: kolkhyan; dalit
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[texts]ओनामासीधं - प्रफुल्ल कोलख्यान
बचपन में हमलोग ओनामासीधं गुरूजी खसला -- गिर पड़े -- चितंग कहकर अपने गुरूडमयुक्त साथी के साथ ठट्ठा किया करते थे। बाद में जाना कि असल में ‘ऊँ नम: सिद्धम’ ही जनविमुख होकर अंतत: ‘ओनामासीधं’ के रूप मे...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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[texts]अपने वतन में पराए - प्रफुल्ल कोलख्यान (Prafulla kolkhyan)
अपने मूल भाषा-क्षेत्र से बाहर रह कर छोटे-मोटे रोजगार और खुदरा कारोबार में लगे लोगों को निकृष्टतम अर्थों में अपने ‘बाहरी’ होने का भारी दबाव झेलना पड़ रहा है। ऐसा लगता है कि राज्य सरकारों की निग...
Keywords: कोलख्यान,kolkhyan
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[texts]गुजरात के गाँधी और अयोध्या के राम - प्रफुल्ल कोलख्यान
राम को अयोध्या और गाँधी को गुजरात में सीमित करना स्थानीयकरण की प्रक्रिया का ही प्रकार्य तो नहीं है! कहीं हम अपनी मासूमियत में राम और गाँधी जैसे जनता के चित्त-नायक के विसर्जन और बाजार के वित्त-...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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[texts]Prafulla Kolkhyan INKAR KA HAQ AUR HAQ KA INKAR - Prafulla Kolkhyan
 INKAR KA HAQ AUR HAQ KA INKAR
Keywords: kolkhyan; hindi
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[texts]किसने कहा जय किसान - प्रफुल्ल कोलख्यान
आज स्कूलों में न तो प्रार्थना है, न संविधान की प्रस्तावना के हम लोग और न ही भारत माता। न तो बच्चों के मन में उस प्रकार की जिज्ञासा है और न ही परिवार में उस दादी माँ के लिए कोई जगह है  जिसमें अपने क...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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[texts]ढलती उम्र में मन की उठान - प्रफुल्ल कोलख्यान
अपनी भौतिक परिस्थतियों के कारण चाँद आसमान से हिल नहीं सकता और कुमुदनी आसमान में जा नहीं सकती! फिर? कुमुदनी के प्राण का अधार पानी चाँद की परछाई के लिए जगह बनाता है। यहीं प्रेम का मन भौतिक स्थिति...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan; hindi; प्रेम
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[texts]पावस मृदुल-मृदुल बरसे - फ्रफुल्ल कोलख्यान
सामाजिकता संबंधों के समुच्चय का ही एक नाम है। आज का एक बड़ा समाजिक संकट यह है कि संबंधों के बीच का पानी सूख गया है। चाहे  संबंध मनुष्य के साथ के हों या अन्य प्राणियों और प्रकृति के ही साथ के क्यो...
Keywords: कोलख्यान; पावस; kolkhyan; hindi
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[texts]Prafulla Kolkhyan Sathaniya Kavi - Prafulla Kolkhyan
Sathaniya Kavi
Keywords: Kolkhyan; Sathaniy; Kavi
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[texts]प्रफुल्ल कोलख्यान की कविताएँ - प्रफुल्ल कोलख्यान
वह कौन लगता हैहमारा आपका हम सबकाउसे किस भाषा में बतायें कि उसे प्यार करना चाहिएयह उसका देश है
Keywords: कोलख्यान; कविता; kolkhyan; kavita
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[texts]Prafulla Kolkhyan Kavitayen.. - Prafulla Kolkhyan
Kavita
Keywords: kolkhyan; kavita; hindi
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[texts]अपने मोर्चे पर मरने की जिद्द - प्रफुल्ल कोलख्यान
.... घर के बदले पहुँच गया अजायब घर। डेढ़ दो घंटे तक घूम-फिर कर देखने के बाद मन कुछ हल्का था। और था यह एहसास कि किन-किन मुश्किलों का सामना करते हुए, उन पर अपने ढंग की विजय हासिल करते हुए मनुष्य आज तक क...
Keywords: kolkhyan; hindi; कोलख्यान
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[texts]अभिप्राय और अर्थ - प्रफुल्ल कोलख्यान
डिब्बे के ऊपर की इबारत चाहे जो बताये गृहस्थ जानता है कि किस डिब्बे में चीनी है किस में नमक! क्षण-क्षण रीतते हुए शब्दों में गृहस्थी के काम लायक अर्थ सँजोने की चिंता करनी ही होगी। आजकल सामान का व्...
Keywords: कोलख्यान,हिंदी,hindi,kolkhyan
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[texts]कुछ तो हक अदा हुआ - प्रफुल्ल कोलख्यान
मातृभाषा का अपना महत्त्व हुआ करता है। निश्चित रूप से इसे स्वीकार करना ही चाहिए। लेकिन राष्ट्रभाषाओं या राजभाषाओं का भी अपना महत्त्व हुआ करता है। राष्ट्रीय जीवन में इसकी अवहेलना नहीं की जा स...
Keywords: कोलख्यान; नागार्जुन; kolkhyan; nagarjun
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[texts]सांप्रदायिकता Link - प्रफुल्ल कोलख्यान
सांप्रदायिकता के बारे में 
Keywords: कोलख्यान.सांप्रदायिकता; kolkhyan
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[texts]प्रफुल्ल कोलख्यान की कविता - प्रफुल्ल कोलख्यान
प्रफुल्ल कोलख्यान की कविता
Keywords: कोलख्यान,कविता,kolkhyan
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[texts]जनतंत्र के मुश्किल में साहित्य - प्रफुल्ल कोलख्यान
‘पिरामिडीय’ संरचना में ‘कई’ के ऊपर ‘कुछ’ की पद्धति से शिखर पर कुछ या कुछेक के लिए जगह होती है। ‘लंबवत’ व्यवस्था में ‘कई’ के ऊपर ‘कुछ’ की नहीं ‘एक’ के ऊपर ‘एक’ और शिखर पर किसी ‘एक’ के लिए ही जगह ...
Keywords: कोलख्यान; जनतंत्र; kolkhyan
Downloads: 13
[texts]असंतोष और आलोचना के बीच आम चुनाव लिंक - प्रफुल्ल कोलख्यान
ऐतिहासिक रूप से बनी भारतीय बहुलात्मकता में सांस्कृतिक और गहरे अर्थ में राजनीतिक प्रकृति की आंतरिक एकता और बाहरी अनेकात्मकता की स्थिति रही है, जबकि इस नवविकासमान भारतीय बहुध्रुवीयता में सा...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; kolkhyan; hindi
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[texts]प्रफुल्ल कोलख्यान की तीन कविताएँ - प्रफुल्ल कोलख्यान
सचमुच एक दुर्लभ दृश्य है स्तनपान कराती हुई माता को देखना जब मैंने आर्टगैलरी में एक ऐसी ही पेंटिंग पर मुग्ध होते विदेशी को देखा तो महसूस किया
Keywords: kolkhyan,कोलख्यान,कविता; kavitayen
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[texts]सभ्यता फिर भी उम्मीद से है - प्रफुल्ल कोलख्यान
बाजारवाद मछली के ही तेल में मछली को भुनने की कारीगरी जानता है। मकरजाल की तरह ‘मनुख-जाल’ उपभोक्ता मन के भीतर से पैदा होता है। …बाजारवाद की मनोरंजक संस्कृति हँसते-हँसाते मनुष्य की प्रतिरोध क्ष...
Keywords: कोलख्यान; सभ्यता; बाजारवाद; kolkhyan
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[texts]भारतीयता का सार - प्रफुल्ल कोलख्यान
उदारीकरण-निजीकरण-भूमंडलीकरण के इस दौर में भीतरी और बाहरी, अपने और पराये, स्थानिक और वैश्विक, तात्कलिक और शाश्वत, शक्ति और शील, सौंदर्य और शिव, नूतन और पुरातन के बीच के द्वंद्व, तनाव और संतुलन बि...
Keywords: kolkhyan; Hindi; Bhartiyta; Alochana
Downloads: 35
[texts]प्रफुल्ल कोलख्यान की कुछ कविताएँ - प्रफुल्ल कोलख्यान
एक अच्छी कविता के बारे मेंसोचते हुएमैं आपके बारे मेंसोचने लगता हूँआपके बारे मेंसोचते हुए मैंएक अच्छी कविता के बारे मेंसोचने लगता हूँ
Keywords: कोलख्यान; कविता; kolkhyan; hindi
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[texts]दगा की, इस सभ्यता ने दगा की - प्रफुल्ल कोलख्यान
जब-जब यह निरपराध आम आदमी मारा जाता है तब-तब तथाकथित खास आदमी की सुरक्षा कड़ी कर दी जाती है । जिस सभ्यता में राजा को किला बनाकर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की छूट हासिल होती है, वह सभ्यता एक दगाब...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; kolkhyan; hindi
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[texts]इनकार का हक और हक का इनकार - प्रफुल्ल कोलख्यान
मकान बनाने की ललक बढ़ी है। घर बसाने की ईहा कम हुई है। तलाक की घटना की संख्या में चिंतनीय वृद्धि हुई है। इन्हें जीवन-यापन में स्थायित्व के अवसरों की कमी से भी जोड़कर देखा जा सकता है। ......
Keywords: कोलख्यान; हक; इनकार; kolkhyan
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[texts]सामाजिक जनतंत्र के सवाल - प्रफुल्ल कोलख्यान
जनतंत्र के राजनीतिक ढाँचे में सामाजिक हित की अंतर्वस्तु के संस्थापन की अटूट प्रक्रिया के सही ढंग से निरंतर संपादित न होते रहने से राजनीतिक जनतंत्र भारी असंतुलन का शिकार हो जाता है। इस असंतु...
Keywords: कोलख्यान; जनतंत्र; सामाजिक; kolkhyan
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[texts]सीमांत पर हिंदी - प्रफुल्ल कोलख्यान Prafulla Kolkhyan
सीमांत पर हिंदी
Keywords: कोलख्यान,kolkhyan,hindi,हिंदी
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[texts]Prafulla Kolkhyan RAVINDRANATH THAKUR KO YAD KARAN KA MATLAB - Prafulla kolkhyan
RAVINDRANATH THAKUR KO YAD KARAN KA MATLAB
Keywords: kolkhyan; ravindranath; bangla
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[texts]नागरिक जमात का रास्ता - प्रफुल्ल कोलख्यान
राजनीति और समाज, दोनों को जोड़ने वाला सामान्य तत्त्व लोकतंत्र होता है। परंपरा में जिंदा उच्चतर मूल्यों को समाज में बचाए रखना और आधुनिक मूल्यबोध की सामाजिक स्वीकृति के लिए संघर्ष आजादी के आं...
Keywords: कोलख्यान; नागरिक; kolkhyan
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[texts]ग्लोबल का बल और राष्ट्रीयता - प्रफुल्ल कोलख्यान
व्यव्स्था चाहे जैसी भी हो, शासन के सत्य और जनता के सत्य में अंतर तो रहता ही है। …. राजनीतिक आजादी के मिलने और जनतंत्र की स्थापना के बाद के प्रारंभिक वर्षों से ही भारत में शासन के सत्य और जनता के स...
Keywords: कोलख्यान; ग्लोबल; राष्ट्रीयता; kolkhyan
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[texts]भारत संघ की संरचना - प्रफुल्ल कोलख्यान
मुझे इस बात की चिंता हो रही है कि भारत संघ की आंतरिक संरचना में विघटनकारी बदलाव हो रहे हैं। भारत का संविधान एक विचार भी है और भावना भी।
Keywords: कोलख्यान; हिंदीसआलोचना; kolkhyan; hindi
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[texts]प्रार्थना और प्रहार - प्रफुल्ल कोलख्यान
प्रार्थना प्राण का कवच नहीं बन सकती। प्रार्थना चाहे जितनी विशिष्ट क्यों न हो वह अंतत: रिरियाहट ही होती है। एक ऐसी रिरियाहट जिसकी कोख में पलती रहती है बर्बरता। किसी कल्पित देवता के मने रिरिया...
Keywords: कोलख्यान; प्रार्थना; kolkhyan
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[texts]असंतोष और आलोचना के बीच आम चुनाव - प्रफुल्ल कोलख्यान
राष्ट्र के सिकुड़ने और बाजार के फैलने के इस संक्रमणकाल में राष्ट्रीय संरचना में अंदर-ही-अंदर बदलाव हो रहा है। यह माना जाना चाहिए कि राष्ट्र के सिकुड़ने और बाजार के फैलने से भारतीय गणराज्य की ...
Keywords: kolkhyan; कोलख्यान; हिंदी; Hindi
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